कि तुम फिर चले जाओगे
अब इस डर के साथ नहीं जिया जाता !
इसलिए तुम्हें नहीं चाहती अब
तुम्हारी यादें ही बहुत हैं
मुझे जिंदा रखने के लिए !!
Saturday, October 9, 2010
क्यों ...
सब कुछ है फिर भी क्यों ये खालीपन है
हंस रही जिंदगी फिर क्यों रोता ये पागल मन है !
क्यों याद तेरी आ जाती है हर ख़ुशी भरे पल में
क्यों हंसी तेरी सुनने को तरस रहा मेरा जीवन है !!
क्यों लगता है की तू ही बोल रहा उन चिड़ियों की चहचाहट में
क्यों लगता है की तेरी ही साँसे हैं उन पत्तियों की सरसराहट में !
क्यों लगता है की रात तेरी ही परछाई है
तभी तो इस रौशनी में भी याद तेरी आई है !
क्यों मन नहीं मानता की तू मुझसे रूठ गया
क्यों लगता है ये नहीं है वो जो सच्चाई है !!
क्यों आज भी मेरी मुस्कुराहटों में तू ही हँसता है
कैसे तूने मेरे हर कण में जगह ये बनायीं है !
अब बस बची ये खोखली हंसी और उदासी है
मेरी जिंदगी ने ये किस चीज़ की कीमत चुकाई है !!
हंस रही जिंदगी फिर क्यों रोता ये पागल मन है !
क्यों याद तेरी आ जाती है हर ख़ुशी भरे पल में
क्यों हंसी तेरी सुनने को तरस रहा मेरा जीवन है !!
क्यों लगता है की तू ही बोल रहा उन चिड़ियों की चहचाहट में
क्यों लगता है की तेरी ही साँसे हैं उन पत्तियों की सरसराहट में !
क्यों लगता है की रात तेरी ही परछाई है
तभी तो इस रौशनी में भी याद तेरी आई है !
क्यों मन नहीं मानता की तू मुझसे रूठ गया
क्यों लगता है ये नहीं है वो जो सच्चाई है !!
क्यों आज भी मेरी मुस्कुराहटों में तू ही हँसता है
कैसे तूने मेरे हर कण में जगह ये बनायीं है !
अब बस बची ये खोखली हंसी और उदासी है
मेरी जिंदगी ने ये किस चीज़ की कीमत चुकाई है !!
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