जीवन मार्ग है परिभाषित,तेरी नियति भी है निश्चित,तू तो है मात्र एक पथिक |फिर क्यों ये व्याकुलता,
क्यों फिर ये क्रंदन |रख मन में ये विश्वास,की होगी पूरी तेरी हर आस |कर स्वीकार हर आमंत्रण,और दिखा संपूर्ण समर्पण |
"क्या", ये तेरी नियति का निर्णय,"कैसे", करना है तुझको निश्चय |तेरे वश में है मात्र कर्म,इसलिए छोड़ नियंत्रण का भ्रम ||