Thursday, December 22, 2011

बादल और चाँद ...


अँधेरी स्याह रात |
बादलों का समुन्दर |
और बस अभी अभी
झाँकने सा लगा है
चाँद
उन बादलों के ऊपर से |
उसकी चांदनी


घुलती सी जा रही है
इस बहती हुई हवा में,
और रोशन कर रही है
तेरे उन वादों को
जो खो से गए थे कहीं,
उस काली अँधेरी रात में |
अरे ये क्या


तेरे वो वादे तैरने लगे हैं,
चांदनी घुली हुई हवा में |
एक घेरा सा बनता जा रहा है
मेरे चारों तरफ,
मैं बेबस खड़ी
देख रही हूँ |
अच्छी लग रही है
तेरे वादों की गर्माहट
तू मुझसे कह रहा हो जैसे


अकेली कहाँ है तू,
सब तो हैं तेरे साथ |
ये झांकता हुआ चाँद
और उसकी पिघलती हुई चांदनी
वो तैरते हुए बादल
और ये सरसराती हुई हवा
सब तो हैं तेरे साथ,
अकेली कहाँ है तू ||


******  (Inspired by a painting of  my friend, Richa Singh)    ******
****** http://archana-richa.blogspot.com/2011/12/blog-post.html  ******

Monday, August 8, 2011

ये जिंदगी तुम्हारी शुक्रगुज़ार है...

था वो एक नया पड़ाव
उस अनवरत सफ़र का
अनगिनत अजनबी चेहरे
पर न जाने क्यों
लगे तुम जाने पहचाने से |

और फिर अच्छी लगने लगी
तुम्हारी बातें,
तुम्हारा सोचना  |
अच्छा लगने लगा
तुम्हारे साथ हंस के
सारी समस्याएं भुला देना |
जब कभी लगी ठोकर
तुम्हारे ही साथ ने दिया हौसला |

वो जो भी था
ये जो भी है
उसके लिए
मेरे दोस्त,
ये जिंदगी तुम्हारी शुक्रगुज़ार है ||

Thursday, June 23, 2011

बेनाम, अपरिभाषित से रिश्ते ....

सिखाया  है 
मेरी  हर  उम्मीद  ने,
कि  शायद  आज  भी  हैं
हम  उतने  ही  अजनबी |
और  फिर  मुझे  तो
 
हक  ही  नहीं
इन   शिकायतों  का  भी | 
मेरे  दोस्त,
तुम्हारे  मेरे   दरमियान
कुछ  भी  तो  ऐसा  नहीं
जिसका  हो  कोई  नाम , कोई  परिभाषा
 
जो  हो  दोस्ती  से  थोडा  ज्यादा |
गलती  शायद  मेरी  ही  थी,
बड़े  खोखले  से  होते  हैं
ये  बेनाम, अपरिभाषित  से  रिश्ते  ||

Monday, June 13, 2011

और हम मिलें दो अजनबियों की तरह ...

अरसा  हो  गया  है  
तुम्हें  गए, 
मन  भूलने  लगा  है 
तुम्हारी  आवाज़,
तुम्हारा   चेहरा 
लगने  लगा  है   अंजाना सा,
उतनी  नहीं  याद  आती अब


तुम्हारी  यादें , 
कोई  अहसास  नहीं  होता 
तुम्हारे  ज़िक्र  से, 
उन   शामों की  यादें
बाकी  हैं 
उन  सुबहों  की  ही  तरह
बहुत  धुंधली  सी,
वो  कमज़ोर  कड़ी
जो  बड़े  जतन  से
सम्हाली  हुई  थी


टूट  सी  रही  है, 
शायद  नहीं  रहा  अब
तुम्हारे  लौटने  का  इंतज़ार,
न  रही  परवाह
इस  बात  की
की  कल  हम  मिलें
और  मिलें  दो  अजनबियों  की  तरह ||

Saturday, May 7, 2011

छोड़ नियंत्रण का भ्रम ....


जीवन मार्ग है परिभाषित,
तेरी नियति भी है निश्चित,
तू तो है मात्र एक पथिक |
फिर क्यों ये व्याकुलता,

क्यों फिर ये क्रंदन |
रख मन में ये विश्वास,
की होगी पूरी तेरी हर आस |
कर स्वीकार हर आमंत्रण, 
और दिखा संपूर्ण समर्पण |

"क्या", ये तेरी नियति का निर्णय, 
"कैसे", करना है तुझको निश्चय |
तेरे वश में है मात्र कर्म,
इसलिए छोड़ नियंत्रण का भ्रम ||

Tuesday, April 5, 2011

सम्पूर्णता में क्या सौन्दर्य ....


सम्पूर्णता   में  क्या  सौन्दर्य ! 
जीवन  को  देती  है लक्ष्य
कुछ  पाने  की  इच्छा , अधूरता !
सौंदर्य  है  उसी  अधूरता  में  ||

अमरता  में  क्या  सौंदर्य !
जीवन  को  सिखाती  है  जीना 
इस  पल  के  अंतिम  होने  की  संभावना, नश्वरता  !
सौन्दर्य  है  उसी  नश्वरता  में  ||

सफलता  में  क्या  सौंदर्य !
हर  प्रयत्न  में   विजय  है  नीरसता  
कभी  कभी  कोई  हार , निर्बलता !
सौंदर्य   है  उसी  निर्बलता  में  ||

समीपता  में  क्या  सोंदर्य !
सुख  दुःख   का  काल  चक्र 
आने  वाली  ख़ुशी  का  संकेत, प्रतीक्षा !
सौंदर्य  है  उसी  प्रतीक्षा  में ||

Wednesday, March 30, 2011

तब भी लड़खड़ाते थे ये कदम .....

तब  भी  लड़खड़ाते  थे  ये  कदम,  मगर  तब  तुझे  वो  नादानी  लगती  थी |
अब उन्हीं   कदमों  की  नादानी  तुझे  नागवार  गुजरती  है ||
एक  बार  फिर  थाम ले  तू   काश, इन  बहकते  कदमों  को |
अब  मेरी  जिंदगानी  बस  इसी   आस  में  गुजरती  है || 

Sunday, February 27, 2011

तेरे होने का अहसास ...

फिर इंतज़ार है दिल को, मेरी गलतियों पे तेरे ऐतराज़ का
तेरे खिलखिलाने की आवाज़ का,
तेरे रूठने के अंदाज़ का,
फिर इंतज़ार है दिल को, तेरे होने के अहसास का .......

Friday, January 28, 2011

उम्मीद ...

हर  उम्मीद  अगर  बेमानी  होती  तो
यूंही  आपका  हम  इंतज़ार  नहीं  करते  |
बस,  आप  हमारे  सब  कुछ  हैं
वरना , अपनी  बेचैनी  का  रोज़ 
यूंही  आपसे  हम  इज़हार  नहीं  करते ||

चाहे  हों  आज  हम  कितने  भी  बेगाने
पर  ये  हसरतो  भरा  दिल  तो  गैर  नहीं ||
बस  इसी  दिल  ने  की  है  ये  जिद,
की  इसे  सुकूं  नहीं  मिलेगा , जब  तक 
यूंही  आपको  हम  बेक़रार  नहीं  करते ||

या  तो  आपको  नहीं  है  क़द्र  हमारी
या   फिर  है  खौफ  इस  ज़माने  का || 
पर  हम  भी  वो  हस्ती  नहीं
जो  मिट  जाए , जब  तक 
यूंही  आप  हमसे  इज़हार - -प्यार  नहीं  करते ||

Saturday, January 1, 2011

सम्पूर्णता ...

आज 
मेरा अस्तित्व निरर्थक है !
क्योंकि
कल
तुम्हारे साथ में सम्पूर्णता थी !!