जो हमने कहना चाहा शब्दों ने वो नहीं कहा
और सब कुछ वो कहते चले गये !
उन शब्दों की लेकिन शिकायत क्या करें,
हम ही तो उनमें बहते चले गए !!
ये हमारी नादानी थी या तुम्हारी समझदारी,
हमने मुस्कुराया और तुम सब समझते चले गये !
तुमने सपने दिखाए लाखों ओर,
हम सब भूलकर उनके साथ रोते चले गए !
हम ही नादान होंगे नहीं तो ऐसा वक़्त नहीं आता,
की तुम सितम करते रहे और हम सहते चले गये !!
पता नहीं क्या सोच के हाथ पकड़ा था तुम्हारा,
एक बार जो छूटा तो बस फासले होते चले गए !
मुस्कुरा के सब सह लेते लेकिन अब क्या,
अपने वजूद को जब हम खोते चले गये !!
awesome!!!!!!!!!!
ReplyDeletebeautiful!!
ReplyDeleteu write well.
contd...
ReplyDeleteदिल कि नादानी हो या बेवफाई हो तुम्हारी,
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी|
माना कि लम्बी अँधेरी रात है और रोशनी कहीं नहीं,
सवेरा तोह होगा ही, इतना है यकीन|
@archana: Right from the heart. Nice one!
- ajeet
u r really a poet gal....
ReplyDeletemak collection of all and publish them...
hey too good yaar :) Great Work!!!!
ReplyDeleteThanks Deepti.... aur collection karke publish karna .... kaafi complicated baat hai... :)
ReplyDeleteThanks to Meghna as well....:)
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ReplyDeleteAwesome.... I enjoyed reading your collection.
nice....... dear
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