Monday, September 27, 2010

तुम्हारी ज़िन्दगी ...

तुमने ही सिखाया था प्यार करना,
तुमने ही दिखाया था ये नया सपना !
फिर क्यों तुमने साथ हमारा छोड़ दिया,
क्यों सारे वादों को यूं तोड़ दिया !!

हम खड़े रहे उन्हीं गलियों में,
क्यों तुमने उन गलियों से मुंह अपना मोड़ लिया !
अगर नहीं थे हम तुम्हारे प्यार के काबिल,
फिर तब क्यों तुमने हमसे अपना नाता जोड़ लिया !!
हम नहीं बिखरे हम नहीं टूटे,
बस तुमने जिन्दा रहने का ख्वाब मरोड़ दिया !!

ये जिंदगी भी तुम्हारी ही थी,
जिन्दा रहते तो किसी और के न हो पाते !
वो फिर नयी जिंदगी देगा,
बस अब सब उसके ही हाथों में छोड़ दिया !!

2 comments: