सब कुछ है फिर भी क्यों ये खालीपन है
हंस रही जिंदगी फिर क्यों रोता ये पागल मन है !
क्यों याद तेरी आ जाती है हर ख़ुशी भरे पल में
क्यों हंसी तेरी सुनने को तरस रहा मेरा जीवन है !!
क्यों लगता है की तू ही बोल रहा उन चिड़ियों की चहचाहट में
क्यों लगता है की तेरी ही साँसे हैं उन पत्तियों की सरसराहट में !
क्यों लगता है की रात तेरी ही परछाई है
तभी तो इस रौशनी में भी याद तेरी आई है !
क्यों मन नहीं मानता की तू मुझसे रूठ गया
क्यों लगता है ये नहीं है वो जो सच्चाई है !!
क्यों आज भी मेरी मुस्कुराहटों में तू ही हँसता है
कैसे तूने मेरे हर कण में जगह ये बनायीं है !
अब बस बची ये खोखली हंसी और उदासी है
मेरी जिंदगी ने ये किस चीज़ की कीमत चुकाई है !!
bahut khub!!
ReplyDeletekafi gehraiyon me jaa ke likhi hui kavita hai!
waise ek baat bataon (last para):
Jab tumhari muskrahaton me wo hansta hai to hansi kokhali kyun hai??
2 panktiya meri taraf se--
tum jiski diwani ho, woh kyun anjana banta hai!
pyar pe marne wale ka, ye anjaam kyun hota hai!!
2 aur :)
tum jiski diwani ho, usko kyun ye khabar nahin!
pyar karne walon ki, kya is duniya me kadar nahin!!
aapki chaaron panktiyaan kaafi acchhi hain :)
ReplyDeleteaur taarif karne ke liye thanks ... :)
ati uttam :)
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