कभी कभी जाके
उसी दोराहे पर,
जी चाहता है
तुम्हारा इंतज़ार करने को,
उसी दोराहे पर
जहां तुम मिले थे आखिरी बार |
और फिर अलग हो गये थे हमारे रास्ते
कुछ दिनो तक रहा इंतज़ार
शायद मिलो तुम कहीं |
पर फिर से नहीं मिला करते
दोहरे से निकले रास्ते,
पर वापस तो जाते हैं
वोही रास्ते
उसी दोहरे पर |
काश तुम भी आओ वापस
एक दिन
मेरी तरह
उसी दोराहे पर,
और क्या पता
हम दोनों वो सब
कह लें
सुन लें
वो सब
जिसके बाद दो रास्तों की जरूरत ही ना रहे,
और ना रहे जरूरत
उस दोराहे की |
i like it.......
ReplyDeleteUSB