था वो एक नया पड़ाव
उस अनवरत सफ़र का
अनगिनत अजनबी चेहरे
पर न जाने क्यों
लगे तुम जाने पहचाने से |
और फिर अच्छी लगने लगी
तुम्हारी बातें,
तुम्हारा सोचना |
अच्छा लगने लगा
तुम्हारे साथ हंस के
सारी समस्याएं भुला देना |
जब कभी लगी ठोकर
तुम्हारे ही साथ ने दिया हौसला |
वो जो भी था
ये जो भी है
उसके लिए
मेरे दोस्त,
ये जिंदगी तुम्हारी शुक्रगुज़ार है ||
Super like!!!!
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